एक पत्थर होता है अफ्रीका में, जो पानी को, भाप को पी जाता है। पारस होता है, थोड़े से उसमें छेद होते हैं, वह भाप को पी लेता है। तो वर्षा में भी वह भाप को पी जाता है, काफी भाप को पी जाते हैं। उस पत्थर का पारस होना दिखाई नहीं पड़ता, लेकिन वह स्पंजी है। उसकी मूर्ति बन जाती है। वह मूर्ति जब गर्मी पड़ती है, जैसे सूरज से अभी पड़ रही है, उसमें से पसीना आने लगता है। उस तरह के पत्थर और भी दुनिया में पाये जाते हैं। पंजाब में एक मूर्ति है, वह उसी पत्थर की बनी हुई है। जब गर्मी होती है, तो भक्तगण पंखा झलते हैं, उस मूर्ति को कि भगवान को पसीना आ रहा है। और बड़ी भीड़ इकट्ठी होती है, क्योंकि बड़ा चमत्कार है, पत्थर की मूर्ति को पसीना आए!
OSHO
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