हमें नित्य ही पूजा पूर्ण श्रधा और विश्वास से करना चाहिए , चाहे वो पूजा २ लम्हों में हो जाए या
२ घंटे में ,
एकाग्र मन से ही पूजा की जाए ,
यही आवश्यक है,
पूजा जितनी जागरूकता
,तत्परता
,एकाग्र मन से की जाएगी उतनी ही सार्थक होगी,
२ घंटे में ,
एकाग्र मन से ही पूजा की जाए ,
यही आवश्यक है,
पूजा जितनी जागरूकता
,तत्परता
,एकाग्र मन से की जाएगी उतनी ही सार्थक होगी,
पूजा करते समय आसन, माला , दिशा ज्ञान होना अति आवश्यक है
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